परिचयः - अन्वयक्रमः #15
पादुके चास्य राज्याय न्यासं दत्वा पुनः पुनः ।
निवर्तयामास ततो भरतं भरताग्रजः ॥
| पदविभागः | विवर्णम् | प्रतिपदार्थम् |
|---|---|---|
| पादुके | पादुका / स्त्री / द्वि.वि / द्वि.व | the pair of sandals |
| च | अव्ययम् | and |
| अस्य | इदम् / पुं / ष.वि / ए.व | of his |
| राज्याय | राज्य / नपुं / च.वि / ए.व | kingdom |
| न्यासम् |
न्यास / पुं / द्वि.वि / ए.व धातुविवरणम् :- अस् [असँ भुवि ; अदादिः ; परस्मैपदी ; अकर्मकः ; सेट्] (to be, to exist) पदविवरणम् :- नि + अस् + घञ् = न्यास / पुं |
as representation for safe-keeping |
| दत्वा |
दत्वा / अव्ययम् धातुविवरणम् :- दा [डुदाञ् दाने ; जुहोत्यादिः ; उभयपदी ; सकर्मकः ; अनिट्] (to give, to provide, to donate, to handover) पदविवरणम् :- दा + क्त्वा = दत्वा / अव्ययम् |
having given |
| पुनः पुनः | अव्ययम् | again and again |
| निवर्तयामास |
नि + वृत् + णिच् + कर्तरि लिँट् / प्र.पु / ए.व धातुविवरणम् :- वृत् [वृतुँ वर्तने ; भ्वादिः ; आत्मनेपदी ; अकर्मकः ; सेट्] (to be, to happen, to be present) |
pursuade / cause to return |
| ततः | अव्ययम् | then |
| भरतम् | भरत / पुं / द्वि.वि / ए.व | to Bharatha |
| भरताग्रजः |
भरताग्रज / पुं / प्र.वि / ए.व पदविवरणम् :- अग्रज / पुं (= elder brother) अग्रे यः जायते सः अग्रजः तम् अनुसृत्य यः जायते सः अनुजः (जन् + कर्तरि लँट् = जायते) समासविवरणम् :- [षष्ठीतत्पुरुशसमासः] भरतस्य अग्रजः = भरताग्रजः |
the brother of Bharata, i.e., Rāma |
| विवरणानि | क्रियापदानि | |||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रधानक्रिया 1.0 (निवर्तयामास) | गौणक्रिया 1.1 (दत्वा) | गौणक्रिया 1.1.1 (न्यासम्) | ||||
| विशेष्यम् | विशेषणम् | विशेष्यम् | विशेषणम् | विशेष्यम् | विशेषणम् | |
| प्र.वि | भरताग्रजः | |||||
| स.प्र.वि | ||||||
| द्वि.वि | भरतम् | न्यासम् | पादुके | |||
| तृ.वि | ||||||
| च.वि | राज्याय | |||||
| प.वि | ||||||
| ष.वि | अस्य | |||||
| स.वि | ||||||
| अव्ययम् | ततः पुनः पुनः च |
|||||
| अन्वयः | ततः भरताग्रजः अस्य राज्याय पादुके न्यासं दत्वा भरतं पुनः पुनः निवर्तयामास । | |||||
| Purport | Bharatha's elder brother, Rāma, having given his pair of sandals for representation (and safe-keeping) to rule his (Bharata's) kingdom, persuaded Bharatha again and again (repeatedly) to return. | |||||
| अन्वयरचना |
पुनः पुनः निवर्तयामास
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