कोविदः - सुभाषितम् #06
साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः ।
तृणं न खादन्नपि जीवमानः तद्भागधेयं परमं पशूनाम् ॥
पदविभागः | पदविवरणम् | प्रतिपदार्थम् |
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साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः |
साहित्यसङ्गीतकलाविहीन / पुं / प्र.वि / ए.व धातुविवरणम् :- हि [हि गतौ वृद्धौ च ; स्वादिः ; परस्मैपदी ; सकर्मकः ; अनिट्] (to go, to grow) गै [गै शब्दे ; भ्वादिः ; परस्मैपदी ; अकर्मकः ; अनिट्] (to sing) हा [ओँहाक् त्यागे ; जुहोत्यादिः ; परस्मैपदी ; सकर्मकः ; अनिट्] (to abandon, to leave, to desert, to omit, to neglect) पदविवरणम् :- हि + क्त = हित / त्रि (-तः-ता-तं) (= welfare, benefit) सहित + भावे ष्यञ् = साहित्य / नपुं (= literary or rhetorical composition) सम् + गै + क्त = सङ्गीत / त्रि (-तः-ता-तं) (= music, sung together in chorus or harmony) कला / स्त्री (= an art) वि + हा + क्त = विहीन / त्रि (-नः-ना-नं) (= without, devoid of) समासविवरणम् :- [सह-पूर्वपद-बहुव्रीहिसमासः] हितेन सह वर्तते इति सहित । (= together with welfare) [इतरेतर-द्वन्द्व-समासः] साहित्यं च सङ्गीतं च कला च = साहित्यसङ्गीतकलाः (= literature, music and art) [तृतीयातत्पुरुषसमासः] साहित्यसङ्गीतकलाभिः विहीनः = साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः (= devoid of literature, music and art) |
one who is without the knowledge of literary compositions, music or art forms |
साक्षात् = अध्यक्षः, प्रत्यक्षः |
साक्षात् / अव्ययम् | evidently, manifestly |
पशुः = मृगः |
पशु / पुं / प्र.वि / ए.व | animal |
पुच्छविषाणहीनः = लाङ्गूल-पशुशृङ्ग-रहितः लूम-पशुशृङ्ग-रहितः |
पुच्छविषाणहीन / पुं / प्र.वि / ए.व धातुविवरणम् :- हा [ओँहाक् त्यागे ; जुहोत्यादिः ; परस्मैपदी ; सकर्मकः ; अनिट्] (to abandon, to leave, to desert, to omit, to neglect) पदविवरणम् :- पुच्छ / पुं & नपुं (= tail) विषाण / त्रि (-णः-णी-णं) (= horn of an animal) हा + क्त = हीन / त्रि (-नः-ना-नं) (= without, devoid of) |
one who is without the tail and horn of an animal |
तृणम् | तृण / नपुं / द्वि.वि / ए.व | grass |
न खादन् = न भक्ष्यन् |
खादत् / पुं / प्र.वि / ए.व धातुविवरणम् :- खाद् [खादृँ भक्षणे ; भ्वादिः ; परस्मैपदी ; सकर्मकः ; सेट्] (to eat, to consume) पदविवरणम् :- खाद् + शतृँ = खादत् / त्रि (-न्-न्ती-त्) (= eating) |
not eating |
अपि | अपि / अव्ययम् | also |
जीवमानः = जीवितः पुरुषः |
जीवमान / पुं / प्र.वि / ए.व धातुविवरणम् :- जीव् [जीवँ प्राणधारणे ; भ्वादिः ; परस्मैपदी ; अकर्मकः ; सेट्] (to live, to revive, to live upon, to survive) पदविवरणम् :- जीव् + शानच् = जीवमान / त्रि (-नः-ना-नं) (= living) |
living |
तत् | तद् / नपुं / प्र.वि / ए.व | that |
भागधेयम् = दैव, दिष्ट, भाग्य, नियति, विधि, कृतान्त, अनय |
भागधेय / नपुं / प्र.वि / ए.व धातुविवरणम् :- धा [डुधाञ् धारणपोषणयोः ; जुहोत्यादिः ; उभयपदी ; सकर्मकः ; अनिट्] (to wear, to obey, to bear, to support, to nourish, to protect) पदविवरणम् :- भाग (= share, happiness) धा + यत् = धेय / त्रि (-यः-या-यं) (= should be held) समासविवरणम् :- [ TBD ] भागेन धीयते असौ = भागधेयः (= portion, luck, fortune) |
portion, luck, fortune |
परमम् = महत् |
परम / नपुं / प्र.वि / ए.व | best, excellent |
पशूनाम् = समस्तजीवराशीणाम् |
पशु / पुं / ष.वि / ब.व | of the animals |
विषयः | विवरणम् |
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अन्वयः | साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः (पुरुषः) साक्षात् तृणं न खादन् अपि जीवमानः पुच्छविषाणहीनः पशुः (भवति) । तत् पशूनाम् परमं भागधेयम् (अस्ति) । |
तात्पर्यम् | TBD |
Purport | A man, who is devoid of the knowledge of literary compositions, music or art forms is manifestly an animal without tail and horns, who is living without feeding on grass. That is an excellent fortune for the animals. |
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ReplyDeleteRavi Shankar Sir... Good Morning & Hope all is well..... I am thankful to you for this great source of learning you have created for Samskrita Bharathi students of Pravesh, Parichaya, Shiksha, and Kovida It has been very helpful. It would be great if you could please update the lessons for KOVIDA Subhashitam no 7 to Subhashitamno. 20. Thanking you. Stay blessed.
ReplyDeleteThank you very much for your kind words sir. Yes, all is well, and hope to hear the same from you. I will find some time to complete the rest as well. Thank you again.
DeleteTHANKS!
DeleteGreat resource and real Vidhya dhAnam.
ReplyDeleteThank you very much !! Glad to hear that this blog is of help.
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